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Adhik Maas 2026: इस साल होंगे 12 नहीं 13 महीने, जानिए क्यों

By July 12, 2023March 12th, 2026No Comments
Adhik Maas

ज्येष्ठ के महीने में साल 2026 में अधिक मास (Adhik Maas 2026) लगने वाला है। इस वर्ष हिन्दू कैलेंडर में 12 नहीं बल्कि 13 महीने होंगे। इसका कारण है अधिक मास का लगना। अधिक मास का अर्थ होता है कि वर्ष में एक अतिरिक्त महीना जुड़ जाना। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार लगभग हर 32 महीने 16 दिन के अंतराल के बाद अधिक मास पड़ता है।

साल 2026 में अधिक मास ज्येष्ठ के महीने में पड़ेगा, जो कि 17 मई 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 को समाप्त होगा। इस कारण वर्ष 2026 में ज्येष्ठ का महीना दो बार आएगा। अधिक मास को मलमास, संसर्प मास और पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है।

ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार अधिक मास का महीना सामान्य रूप से मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश या अन्य शुभ कार्य करने से परहेज़ किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस समय व्यक्ति को पूजा-पाठ, जप, ध्यान और दान पर अधिक ध्यान देना चाहिए। अधिक मास के दौरान भगवान विष्णु और भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। पूरे महीने भगवान का स्मरण और भक्ति करने को शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं अधिक मास के नियम, अधिक मास में क्या करें, अधिक मास में क्या न करें और अधिक मास में पूजा करने के क्या लाभ बताए गए हैं।

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Adhik Maas 2026 की तिथि

वैदिक शास्त्रों के अनुसार अधिक मास समय-समय पर आता है और यह लगभग तीन वर्षों के अंतराल के बाद पड़ता है। पंचांग की गणना के अनुसार साल 2026 में अधिक ज्येष्ठ मास 17 मई से शुरू होकर 15 जून 2026 तक रहेगा

हिन्दू ग्रंथों में अधिक मास

अधिक मास (Adhik Maas) का वर्णन बहुत से हिन्दू ग्रंथों में देखने को मिलता है। हिन्दू ग्रंथों के अनुसार हिन्दू कैलेंडर सूर्य और चन्द्रमा की साल में जो गणना होती है उससे ज्योतिषी बनाते हैं। अधिक मास चंद्र वर्ष का बचा हुआ हिस्सा होता है जो 12 महीनों में नहीं आता है। यह महीने पूरे 3 साल के बचे हुए दिनों को मिलाकर बनता है। यह 32 माह 16 दिन और 8 घंटे के अंतराल से बनता है। सूर्य और चंद्र साल के बीच यह अंतर खत्म करने के लिए ही हिन्दू कैलेंडर में हर 3 साल में अधिक मास लगता है।

इसके पीछे एक मत यह भी मिलता है की साल में सूर्य एक साल में 365 दिनों तक निकलता है लेकिन वहीं चन्द्रमा साल में 364 दिन ही निकल पाते हैं इस प्रकार यदि इसमें एक साल में बचे हुए दिनों की गणना की जाये तो एक साल में 11 दिन शेष बच जाते हैं और यदि 3 साल में इसी प्रकार 11+11 +11 तीनों को जोड़ा जाये तो यह 33 होता है इसी प्रकार से 3 साल में बचे हुए यह 33 दिन ही अधिक मास माना जाता है।

अधिक मास के नियम

  • अधिक मास के देवता भगवान विष्णु और भगवान शिव को माना जाता है इसलिए अधिक मास के दौरान भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इन दोनों देवताओं की अधिकमास में पूजा करने के लाभ आप खुद-ब-खुद देखेंगे।
  • रोज सुबह जल्दी उठकर सूर्यदेव को जल चीनी और दूध ड़ाल का जल अर्पित करें।
  • इसके पश्चात शिवलिंग पर दूध और जल में फूल ड़ाल कर उसको अर्पित करें।
  • अब भगवान शिव की आरती गाएं और इसके पश्चात भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। सबसे पहले एक घी का दीपक जलाएं और उसके सामने बैठ विष्णु कवच और विष्णु मंत्रों का जाप करें।
  • इस दिन दीप दान करने को बहुत शुभ माना गया है। किसी भी मंदिर, कुवें, स्कूल, घर या फिर गंगा के घाट पर दीपक जलाने से आपकी ज़िन्दगी में भी रोशनी आएगी।
  • इस माह में दान करना सबसे अच्छा माना जाता है। इस दौरान आपको अन्न दान, वस्त्र दान और सभी जरूरतों के सामान को दान करना चाहिए। इस दिन विशेष रूप से आपको जल का भरा हुआ एक घड़ा और मालपुएं को दान करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्रों में इसका उल्लेख मिलता है। इससे सुख समृद्धि आपके घर में आती है।

Adhik Maas 2026 का महत्व

हिन्दू धर्म में अधिक मास महत्व विशेष बताया गया है। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार यदि आप अधिक मास में भगवान विष्णु या भगवान शिव की पूजा करते हैं तो इसका आपको विशेष फल मिलता है। इस एक महीने की पूजा में आप नार्मल एक महीने की पूजा से 10 गुना ज्यादा पुण्य कमा सकते हैं। अधिक मास में दान करने का भी अधिक महत्व बताया गया है। अधिक मास के देवता भगवान विष्णु और भगवान शिव हैं इसलिए दोनों देवताओं की शाम के समय आरती करने से आपको लाभ होता है।

अधिक मास के दौरान आप तप और पूजा के द्वारा अपने बुरे कर्मों को खत्म कर सकते हैं और पुण्य कमा सकते हैं। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार अधिक मास के दौरान पूजा-पाठ करने से हमारे शरीर के अंदर के 5 तत्वों को नयी सकारात्मक ऊर्जा मिलती है जिस वजह से हमारी बुद्धि और दिमाग तेज चलते हैं।

अधिक मास कथा

अधिक मास से जुड़ी हुई हिरण्यकश्यप की कथा भी प्रचलित है। इस कथा के अनुसार दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उन्हें वरदान मांगने के लिए कहा।

हिरण्यकश्यप ने अमर होने का वरदान मांगा, लेकिन ब्रह्मा जी ने कहा कि अमर होने का वरदान किसी को नहीं दिया जा सकता। तब हिरण्यकश्यप ने ऐसा वरदान मांगा कि उसे न कोई मनुष्य मार सके, न कोई पशु, न दिन में, न रात में, न घर के अंदर और न घर के बाहर।

इस वरदान के कारण हिरण्यकश्यप अत्याचारी हो गया। अंत में भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार धारण किया और संध्या के समय घर की दहलीज पर अपने नखों से हिरण्यकश्यप का वध किया।

Adhik Maas में क्या करें?

  • अधिक मास में प्रतिदिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक करना शुभ माना जाता है। आप इसमें जल, शहद, घी, दूध, दही, मिश्री, गन्ना और मावे का मिश्रण बना कर अभिषेक कर सकते हैं।
  • अधिक मास में पंचमी तिथि बहुत शुभ मानी जाती है। पंचमी तिथि के दिन आप तुलसी में गन्ने का रस सुबह के समय अर्पित करें। इससे आपको सुख- समृद्धि प्राप्त होती है। आपको जीवन में कभी भी धन से वंचित नहीं रहना पड़ेगा।
  • अधिकमास के महीने में स्त्रियों को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर गंगा नदी में स्नान करना शुभ होता है यदि गंगा नदी में स्नान करना संभव नहीं हैं तो, अपने घर में ही पानी में गंगाजल ड़ाल कर स्नान करना चाहिए। इससे उनके पतियों की उम्र लम्बी होती है।
  • अधिक मास में अपने घर में भागवत कथा कराना बहुत शुभ माना जाता है इससे जातक को स्वर्गलोक में स्थान मिलता है। भगवान विष्णु के अवतार भगवान शालिग्राम का ध्यान करके भागवत कथा करवा सकते हैं।
  • यदि आपको अपने घर में सुख समृद्धि लानी हैं तो आपको जिस दिन से अधिक मास प्रारंभ होगा उसी दिन से घर में अखंड ज्योत प्रज्वलित करें और सम्पूर्ण अधिक मास में उसको जलाएं रखें। ऐसा करने से आपको अधिक लाभ प्राप्त होगा। घर में धन की कमी नहीं आएगी। और आप जीवन में सफलता प्राप्त करेंगे।
  • अधिक मास में पड़ने वाले प्रत्येक सोमवार और रविवार के दिन हवन कराएं। हवन में गायत्री मंत्र, विष्णु भगवान के मंत्र, भगवान शिव के मंत्रों से अग्नि कुंड में आहुति प्रदान करें। इससे आपके घर में कोई भी बुरी शक्ति नहीं आएगी और आपको जीवन में सफलता प्राप्त होगी। आप चाहे तो पूरे महीने भी हवन कर सकते हैं।

Adhik Maas में क्या नहीं करें?

  • अधिक मास के दौरान किसी भी तरह का मंगल कार्य नहीं किया जाता है। इस दौरान विवाह, जनेऊ संस्कार, नामकरण संस्कार या कोई भी अन्य मंगल कार्य नहीं किया जाता है।
  • अधिक मास के दौरान आपको अपनी कोई नयी नौकरी या कोई नया व्यापार भी नहीं शुरू करना चाहिए। इस समय में कोई भी नया कार्य नहीं करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो वह पूरा नहीं होता है या चलने से पहले ही खत्म हो जाता है।
  • अधिक मास के दौरान आपको नया घर भी नहीं लेना चाहिए न ही ग्रह प्रवेश करना चाहिए। किसी बच्चे का मुंडन संस्कार करना भी अशुभ माना जाता है। इसलिए यह भी न करें।
  • सावन के महीने में अधिक मास का महीना है इसलिए आपको इस दौरान किसी भी प्रकार का कोई मांस मदिरा खाने पीने से परहेज करना चाहिए। ऐसा करने से आप पर नकारात्मक शक्तियां हावी हो सकती हैं।
  • अपने विचारों को किसी के लिए भी गन्दा न रखें। अधिक मास के दौरान अपने विचारों को शुद्ध रखें। ऐसा करने से आपको एक महीने बाद अपने अंदर बहुत बदलाव देखने को मिलेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

 

1. Adhik Maas 2026 में कब पड़ रहा है?

हिंदू पंचांग के अनुसार साल 2026 में Adhik Maas ज्येष्ठ महीने में पड़ रहा है। अधिक ज्येष्ठ मास 17 मई 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 को समाप्त होगा।

2. अधिक मास कितने सालों के अंतराल में आता है?

अधिक मास लगभग हर 32 महीने 16 दिन के अंतराल में आता है, जिसे सामान्य रूप से लगभग तीन वर्षों के आसपास माना जाता है। यह सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच होने वाले अंतर को संतुलित करने के लिए पंचांग में जोड़ा जाता है।

3. अधिक मास में किस देवता की पूजा की जाती है?

अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और इसे मुख्य रूप से भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस दौरान भगवान विष्णु के साथ भगवान शिव की पूजा करना भी शुभ माना जाता है।

4. अधिक मास की तिथि क्या है?

साल 2026 में अधिक मास 17 मई से शुरू होकर 15 जून 2026 तक रहेगा। इस दौरान ज्येष्ठ मास दो बार आता है, इसलिए इसे अधिक ज्येष्ठ मास कहा जाता है।

5. अधिक मास का क्या अर्थ होता है?

हिंदू कैलेंडर के अनुसार अधिक मास का अर्थ है वर्ष में एक अतिरिक्त चंद्र मास का जुड़ जाना। जब सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच का अंतर बढ़ जाता है, तब पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है, जिससे वर्ष में 12 की जगह 13 महीने हो जाते हैं।

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