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कुंडली में मंगल की स्थिति और मनुष्य के जीवन पर इसके शुभ अशुभ प्रभाव

By March 16, 2023December 6th, 2023No Comments
Position of Mars in Kundli

हमारा ब्रह्मांड़ सूरज, चांद, सितारें, धुमकेतु और 9 ग्रहों से मिलकर बना है। कुल मिलाकर यह 360 अंशों में बंटा हुआ है। जिसमें 27 नक्षत्र, 9 ग्रहों और 12 राशियों को आधार माना गया है। हमारे जीवन में इन 9 ग्रहों का बहुत महत्तव है। इन 9 ग्रहों का व्यक्ति के जीवन पर असर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पड़ता है। इन नौ ग्रहों से मनुष्य को उसके जीवन में शुभ, अ्शुभ फल प्राप्त होते है। देखा जाए तो हर मनुष्य की कुंडली में इन 9 ग्रहों का रहना उसके शुभ, अशुभ का संकेत ही नहीं देता बल्कि उसके शारीरिक स्वास्थ्य पर भी असर डालता है।हिन्दु धर्म शास्त्रों में भी ऋषियों ने सूरज को मस्तक पर स्थान दिया है।चिंता करना, सोचना, कोई प्रतिक्रिया देना इन सभी का आधार सूर्य ग्रह को माना गया है। 

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तो चर्चा करते है मंगल ग्रह की और इसका हमारे जीवन पर प्रभाव:

ग्रह एक ऐसा माध्यम है जो व्यक्ति का भूत, भविष्य और वर्तमान तय करते है। हर ग्रह की अपनी एक ख़ासियत होती है। ग्रह मनुष्य के मंगल पारिवारिक जीवन में अहम भूमिका निभाते है। जैसे- शनि ग्रह व्यक्ति के कर्म के अनुसार उन्हें फल देता है। इसलिए शनि ग्रह को कर्म का दाता भी कहा जाता है। वैसे ही शुक्र को सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है। खै़र हर ग्रह की अपनी ख़ासियत के अलावा हम मंगल ग्रह को सबसे अनोखा ग्रह मानते है।

मंगल की उत्पत्ति-

पुराणों में मंगल की उत्पत्ति के बारे में कई कहानियां देखने को मिलती है। महाभारत की माने तो मंगल का जन्म भगवान कार्तिकेय के शरीर से हुआ था। लेकिन स्कंद पुराण में भगवान विष्णु के पसीने की एक बूंद से धरती द्वारा मंगल का जन्म हुआ था। अधिकतर लोगों का मानना है कि मंगल पृथ्वी की संतान है।

Bhagwan Kartikaye

मंगल की स्थिति का व्यक्ति के जीवन पर असर-

बाकी ग्रहों की तरह मंगल का भी कुंडली में अहम स्थान है। बाढ़, तूफान, सुनामी आदि कई आपदाओं से धरती को मंगल बचाता है। इसके अलावा शनि, राहु, केतु के बुरे प्रभाव से भी मंगल को बचाता है। इसके साथ-साथ मंगल प्रकृति में परिवर्तन का भी एक कारण है। जिसमें प्रकृति का लाल रंग और समुद्र में मूंगे की पहाड़ियों का जन्म लेना मंगल के ही कारण होता है। हिन्दू धर्म में मंगल के बारे में कई धारणाएं देखने को मिलती है।

हिन्दू धर्म में में मंगल को काफी शुभ माना जाता है। लोग भगवान से जब भी प्रार्थना करते है। अपने और दूसरों के मंगल पारिवारिक जीवन की कामना करते है। आपका सब मंगल हो, आपका दिन मंगलमय हो ऐसे शब्द हमें अक्सर सुनने को मिलते है। जो बताते है कि हिंदू समाज में मंगल का क्या महत्व है।

कुंडली में मंगल-

व्यक्ति के जीवन के 12 भाव में मंगल की चर्चा की गई है। इन सब भाव में प्रथम भाव में मंगल का होना व्यक्ति के जीवन में कई विशेष बदलाव लेकर आता है। ऐसे व्यक्तियों की विशेषता यह होती है कि यह दबाव में रहना पसंद नहीं करते। अपना रास्ता खुद तय करते है। इनमें साहस, निडरता की कोई कमी नहीं होती। हर क्षेत्र में इन्हें सफलता हासिल होती है। शारीरिक दृष्टि से भी यह काफी मजबूत होते है। जहां यह हर तरफ ऊंचाइयों को छूते है। वहीं इनका पारिवारिक जीवन काफी उथल-पुथल भरा होता है।

यह व्यक्ति अक्सर अपने माता-पिता और जीवनसाथी के साथ बुरा व्यवहार से पेश आते है। कुंडली के प्रथम भाव में मंगल का होना उनके निजी जीवन पर बहुत बुरा असर डालता है। शत्रुओं से छत्तीस का आंकड़ा बना रहता है। भले ही यह दिखने में सुंदर न लगे पर उनके चेहरे पर हमेशा तेज बना रहता है। यह काफी आकर्षक व्यक्तित्व के होते है।

मंगल और करियर-

मंगल तेज, शौर्य, हिम्मत, शक्ति के साथ-साथ भावनाओं का भी स्वामी है। व्यक्ति के जीवन में मंगल ग्रह शुभ-अशुभ प्रभाव डालने के साथ साथ उनके करियर में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। मंगल ग्रह का कुंडली के सभी भावों पर प्रभाव पड़ता है।

Smiling Girl

प्रथम भाव में मंगल-

प्रथम भाव में मंगल वाले व्यक्ति बहुत प्रतिभावान होते है। इन्हें सिर्फ जितना अच्छा लगता है। कठिन से कठिन अवस्था में यह सफलता के झंडे गाड़ते है। जहां एक तरफ यह सफलता प्राप्त होती है। वहीं दूसरी तरफ इनका निजी जीवन उतना ही अशुभ होता है।

दूसरे भाव में मंगल-

दूसरे भाव में मंगल वाला व्यक्ति राजयोग प्राप्त करने वाला होता है। यह स्वभाव में बहुत उग्र होते है इन्हें अपना ही कार्य करना पसंद होता है औरों का नहीं। लेकिन ऐसे व्यक्ति नशे के आदि होते है जिससे उनके शैक्षिक कार्यों में रुकावट आती है।

Stress Person

तीसरे भाव में मंगल-

व्यक्ति के तीसरे भाव का मंगल और करियर का मिला जुला रूप देखने को मिलता है। मंगल व्यक्ति को धैर्यवान और साहसी बनाता है। ऐसे जातक अपनी मेहनत के बल पर अपना नाम बनाते है। यह किसी पर निर्भर रहना पसंद नहीं करते। ऐसे जातक को सरकारी नौकरी जल्द ही मिलती है। लेकिन उनकी रूचि टेक्निकल के काम में ज्यादा होती है। ऐसे व्यक्ति अगर दान करते है तो इनके लिए यह बेहद शुभ माना जाता है। यह व्यक्ति तब तक नहीं रूकते जब तक ये अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर लेते। उन्हें अपनी नींद से ज्यादा शिक्षा प्यारी होती है।

ऐसे ही व्यक्ति के 12 भावों में मंगल की स्थिति को दिखाया गया है। जिनमें समय के हिसाब से हर एक भाव में मंगल के महत्व को दिखाया गया है। व्यक्ति की कुंडली में मंगल की दशा और दिशा तय करते है। अगर व्यक्ति का मंगल अच्छा हो तो व्यक्ति के लिए कुछ भी पाना बहुत आसान है और अगर व्यक्ति का मंगल कमजोर हो तो व्यक्ति के आसान काम भी नहीं हो पाते। किसी लड़के या लड़की का मांगलिक होना एक विशेष उदाहरण है जो उनकी कुंडली के मंगल दोष को दिखाता है। ऐसे लड़के लड़कियों की शादी में अक्सर अड़चन आती है उन्हें दूर करने के लिए मांगलिक दोष का उपाय बताया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

1. ज्योतिष में मंगल क्या दर्शाता है?

मंगल युद्ध का देवता कहलाता है। ज्योतिष में मंगल रूचक महापुरुष योग और मनोगत विज्ञान का प्रदाता माना जाता है।

2. व्यक्ति की कुंडली में मंगल अशुभ कब होता है?

यदि व्यक्ति की कुंडली के पांचवे या नौवें भाव में सूर्य के साथ मंगल हो तो मंगल अशुभ माना जाता है।

3. मंगल का घर कौन सा है?

व्यक्ति की कुंडली में मंगल पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें भाव में पाया जाता है।

4. कितने साल तक मंगल दोष रहता है?

28 वर्ष की उम्र के बाद व्यक्ति की कुंडली में मंगल दोष स्वतःही समाप्त हो जाता है। इसके अलावा केंद्र में चंद्र हो तो मंगल दोष नहीं लगता।

5. विवाह में मंगल दोष क्या दर्शाता है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल के प्रभाव से पैदा हुए व्यक्ति को मांगलिक कहा जाता है।

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अगर आप भी अपनी कुंडली में मंगल की स्थिति को जानना चाहते हैं तो आज ही इंस्टाएस्ट्रो के ज्योतिषी से बात करें

 

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anjali

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