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आख़िर क्यों इतना खास होता है कार्तिक माह?

By January 20, 2026March 27th, 2026No Comments
आख़िर क्यों इतना खास होता है कार्तिक माह?

हिन्दू धर्म में कार्तिक माह को अत्यंत पवित्र माना जाता है। 2026 में यह 24 अक्टूबर से 24 नवंबर तक रहेगा। इस दौरान भगवान विष्णु और तुलसी पूजा, व्रत, दान और साधना को विशेष शुभ माना जाता है।

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कार्तिक मास का महत्व

कार्तिक मास में आने वाली देवउठनी एकादशी का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा के बाद जागते हैं। इसी दिन से चातुर्मास समाप्त होता है और विवाह, गृह प्रवेश तथा अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत की जाती है।

इसी महीने में तुलसी विवाह भी किया जाता है, जिसमें तुलसी माता और शालिग्राम जी का विवाह कराया जाता है। यह अनुष्ठान आमतौर पर देवउठनी एकादशी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा के बीच किया जाता है। कार्तिक मास में धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और छठ जैसे कई बड़े त्योहार भी मनाए जाते हैं।

इसलिए यह महीना धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पूरे महीने गंगा स्नान, दीपदान और भगवान विष्णु की आराधना करने से पुण्य प्राप्त होता है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं, ऐसी मान्यता है।

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कार्तिक मास में तुलसी पूजन

कार्तिक मास में तुलसी माता की पूजा का विशेष महत्व होता है, क्योंकि तुलसी को भगवान विष्णु की प्रिय माना गया है। मान्यता है कि इस पूरे महीने हर शाम तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाने से घर में सुख और समृद्धि आती है। 

तुलसी के नीचे प्रतिदिन दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है, ऐसा माना जाता है। कार्तिक मास के अंत में कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी और शालिग्राम का विवाह कराया जाता है। यह पूजा बहुत शुभ मानी जाती है।

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कार्तिक महीने में क्या खाएं और क्या नहीं

  • पौराणिक कथाएं कहती हैं कि कार्तिक मास (Kartik Maah) में भगवान विष्णु मतस्य अवतार में आते हैं। इसलिए इस मास में भूलकर भी मछली या अन्य मांसाहारी भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। इस माह में तामसिक चीजों से भी परहेज़ करना चाहिए। प्रतिदिन ताज़ा व सात्विक आहार का ही सेवन करना चाहिए।
  • कार्तिक माह में बैंगन खाना भी अशुभ माना जाता है। इसलिए कई घरों में कार्तिक पूर्णिमा के बाद ही बैंगन बनाया जाता है।
  • कार्तिक के महीने में दही व जीरा का सेवन नहीं करना चाहिए। जीरा खाने से सेहत को नुकसान हो सकता है और दही आर्थिक हानि पहुंचा सकता है। दही खाना संतान के लिए भी अशुभ माना जाता है।
  • कार्तिक मास में करेले का सेवन भी नहीं करना चाहिए क्यूंकि इससे वात रोग बढ़ता है जो सेहत के लिए हानिकारक है। इसलिए करेले का परहेज़ करना चाहिए।
  • कार्तिक के महीने में मूली खाना लाभकारी होता है। इस महीने में कफ दोष और पित्त दोष से संबंधित रोग होने का खतरा रहता है। इसलिए इन्हें नियंत्रण में रखने के लिए मूली का सेवन करना चाहिए। यह सेहत के लिए अच्छी मानी जाती है।

What to eat and what not to eat in Kartik month

कार्तिक स्नान की विधि

कार्तिक के पावन महीने में गंगा नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है। यदि नदी में स्नान करना संभव हो तो किसी भी तालाब अथवा पोखर में कार्तिक स्नान कर सकते हैं। और यदि वह भी संभव हो तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिला लेना चाहिए।

यह स्नान तब करना चाहिए जब दो घड़ी रात बाकी रह जाए। यानि कि भोर होने से पहले। यही स्नान उत्तम माना जाता है और इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। सूर्योदय काल में किया गया स्नान मध्यम माना जाता है। इसलिए सर्वाधिक लाभ के लिए सूर्योदय से पूर्व ही स्नान कर लेना चाहिए। 

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कार्तिक मास में ज़रूर करें ये शुभ कार्य

कार्तिक मास (Kartik Maah) में लगातार 30 दिन तक तुलसी माता के नीचे घी का दीपक जलाना चाहिए। कार्तिक महीने में इन नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए।

यदि किसी कारण वश पूरे महीने दीपक नहीं लगा सकते हैं तो कार्तिक एकादशी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक लगातार 5 दिन दिया जलाना चाहिए। तुलसी जी की पूजा करने से माता लक्ष्मी और साथ ही भगवान कुबेर भी प्रसन्न होते हैं।

पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार भगवान विष्‍णु ने स्‍वयं कुबेरजी से कहा था कि कार्तिक मास में जो मेरी उपासना करे उसे कभी धन की कमी मत होने देना। कार्तिक मास में शाम को भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए पूजास्थल पर तिल के तेल का दीपक जलाना चाहिए।

इससे श्री हरि प्रसन्न होते हैं। कार्तिक माह में दान-धर्म करना भी उचित माना गया है। जरूरतमंदों को अन्न तथा वस्त्रों का दान करना चाहिए। इस पवित्र माह में भगवान सूर्य को अर्घ्य देने की भी मान्यता है।प्रतिदिन सूर्य भगवान को जल अर्पण करना चाहिए। 

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निष्कर्ष

कार्तिक मास 2026 आस्था, अनुशासन और साधना का विशेष समय माना जाता है। इस महीने किए गए व्रत, पूजा, दान और नियमों का पालन जीवन में सकारात्मकता और संतुलन लाता है। श्रद्धा के साथ किए गए कर्मों से आध्यात्मिक और मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

 

1-2026 में कब से शुरू होगा कार्तिक मास ?

वर्ष 2026 में कार्तिक मास 24 अक्टूबर से शुरू होगा और 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के साथ समाप्त होगा। शरद पूर्णिमा के अगले दिन से इस पवित्र महीने की शुरुआत मानी जाती है।

2-कार्तिक मास की विशेषता क्या है ?

कार्तिक मास में तुलसी विवाह किया जाता है। इस महीने धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और छठ जैसे प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं, इसलिए इसे अत्यंत शुभ माना जाता है।

3-कार्तिक के महीने में तुलसी पूजन क्यों किया जाता है ?

तुलसी माता भगवान विष्णु को प्रिय मानी जाती हैं। इसलिए कार्तिक मास में तुलसी पूजन किया जाता है। प्रतिदिन तुलसी के नीचे घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।

4-कार्तिक माह में गंगा स्नान की विधि क्या है ?

कार्तिक मास में सूर्योदय से पहले गंगा स्नान करना शुभ माना जाता है। यदि गंगा जाना संभव न हो तो किसी नदी, तालाब या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।

5-कार्तिक मास के नियम क्या हैं ?

कार्तिक मास में तुलसी के नीचे दीपक जलाना, भगवान विष्णु की पूजा करना, दान देना और प्रतिदिन सूर्य को जल अर्पित करना शुभ और पुण्यदायक माना जाता है।
 

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Yashika Gupta

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