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आख़िर क्यों इतना खास होता है कार्तिक माह?

By October 27, 2022March 13th, 2026No Comments
Lord Krishna

हिन्दू धर्म में कार्तिक मास (Kartik Maah) को सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह महीना भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। हिन्दू पंचांग के अनुसार 2026 में कार्तिक मास 24 अक्टूबर से शुरू होकर 24 नवंबर तक रहेगा। कार्तिक पूर्णिमा के दिन इस मास का समापन होता है। इस पूरे महीने को पूजा, व्रत, दान और साधना के लिए बहुत शुभ माना गया है। विशेष रूप से भगवान विष्णु और तुलसी माता की पूजा इस समय की जाती है। आइए जानते हैं कि आखिर कार्तिक मास को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है।

Statue of lord krishna

कार्तिक मास का महत्व

कार्तिक मास में आने वाली देवउठनी एकादशी का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा के बाद जागते हैं। इसी दिन से चातुर्मास समाप्त होता है और विवाह, गृह प्रवेश तथा अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत की जाती है। इसी महीने में तुलसी विवाह भी किया जाता है, जिसमें तुलसी माता और शालिग्राम जी का विवाह कराया जाता है। यह अनुष्ठान आमतौर पर देवउठनी एकादशी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा के बीच किया जाता है।

कार्तिक मास में धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और छठ जैसे कई बड़े त्योहार भी मनाए जाते हैं। इसलिए यह महीना धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस पूरे महीने गंगा स्नान, दीपदान और भगवान विष्णु की आराधना करने से पुण्य प्राप्त होता है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं, ऐसी मान्यता है।

Lord Krishna

कार्तिक मास में तुलसी पूजन

कार्तिक मास में तुलसी माता की पूजा का विशेष महत्व होता है, क्योंकि तुलसी को भगवान विष्णु की प्रिय माना गया है। मान्यता है कि इस पूरे महीने हर शाम तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाने से घर में सुख और समृद्धि आती है।

तुलसी के नीचे प्रतिदिन दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है, ऐसा माना जाता है। कार्तिक मास के अंत में कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी और शालिग्राम का विवाह कराया जाता है। यह पूजा बहुत शुभ मानी जाती है।

Tulsi Plant

कार्तिक महीने में क्या खाएं और क्या नहीं

पौराणिक कथाएं कहती हैं कि कार्तिक मास (Kartik Maah) में भगवान विष्णु मतस्य अवतार में आते हैं। इसलिए इस मास में भूलकर भी मछली या अन्य मांसाहारी भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। इस माह में तामसिक चीजों से भी परहेज़ करना चाहिए। प्रतिदिन ताज़ा व सात्विक आहार का ही सेवन करना चाहिए।

कार्तिक माह में बैंगन खाना भी अशुभ माना जाता है। इसलिए कई घरों में कार्तिक पूर्णिमा के बाद ही बैंगन बनाया जाता है।

कार्तिक के महीने में दही व जीरा का सेवन नहीं करना चाहिए। जीरा खाने से सेहत को नुकसान हो सकता है और दही आर्थिक हानि पहुंचा सकता है। दही खाना संतान के लिए भी अशुभ माना जाता है।

कार्तिक मास में करेले का सेवन भी नहीं करना चाहिए क्यूंकि इससे वात रोग बढ़ता है जो सेहत के लिए हानिकारक है। इसलिए करेले का परहेज़ करना चाहिए।

कार्तिक के महीने में मूली खाना लाभकारी होता है। इस महीने में कफ दोष और पित्त दोष से सम्बंधित रोग होने का खतरा रहता है। इसलिए इन्हें नियंत्रण में रखने के लिए मूली का सेवन करना चाहिए| यह सेहत के लिए अच्छी मानी जाती है।

What to eat and what not to eat in Kartik month

कार्तिक स्नान की विधि

कार्तिक के पावन महीने में गंगा नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है। यदि नदी में स्नान करना संभव हो तो किसी भी तालाब अथवा पोखर में कार्तिक स्नान कर सकते हैं। और यदि वह भी संभव हो तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिला लेना चाहिए। यह स्नान तब करना चाहिए जब दो घडी रात बाकी रह जाए। यानि कि भोर होने से पहले। यही स्नान उत्तम माना जाता है और इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। सूर्योदय काल में किया गया स्नान मध्यम माना जाता है। इसलिए सर्वाधिक लाभ के लिए सूर्योदय से पूर्व ही स्नान कर लेना चाहिए। 

Kartik Snan

कार्तिक मास में ज़रूर करें ये शुभ कार्य

कार्तिक मास (Kartik Maah) में लगातार 30 दिन तक तुलसी माता के नीचे घी का दीपक जलाना चाहिए। कार्तिक महीने में इन नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए।

यदि किसी कारण वश पूरे महीने दीपक नहीं लगा सकते हैं तो कार्तिक एकादशी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक लगातार 5 दिन दिया जलाना चाहिए। तुलसी जी की पूजा करने से माता लक्ष्मी और साथ ही भगवान कुबेर भी प्रसन्न होते है। पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार भगवान विष्‍णु ने स्‍वयं कुबेरजी से कहा था कि कार्तिक मास में जो मेरी उपासना करे उसे कभी धन की कमी मत होने देना। कार्तिक मास में शाम को भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए पूजास्थल पर तिल के तेल का दीपक जलाना चाहिए। इससे श्री हरि प्रसन्न होते हैं। कार्तिक माह में दान-धर्म करना भी उचित माना गया है। ज़रुरतमंदों को अन्न तथा वस्त्रों का दान करना चाहिए। इस पवित्र माह में भगवान सूर्य को अर्घ्य देने की भी मान्यता है।प्रतिदिन सूर्य भगवान को जल अर्पण करना चाहिए। 

Ghee Ke Diye

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1-2026 में कब से शुरू होगा कार्तिक मास ?

वर्ष 2026 में कार्तिक मास 24 अक्टूबर से शुरू होगा और 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के साथ समाप्त होगा। शरद पूर्णिमा के अगले दिन से इस पवित्र महीने की शुरुआत मानी जाती है।

2-कार्तिक मास की विशेषता क्या है ?

कार्तिक मास में तुलसी विवाह किया जाता है। इस महीने धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और छठ जैसे प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं, इसलिए इसे अत्यंत शुभ माना जाता है।

3-कार्तिक के महीने में तुलसी पूजन क्यों किया जाता है ?

तुलसी माता भगवान विष्णु को प्रिय मानी जाती हैं। इसलिए कार्तिक मास में तुलसी पूजन किया जाता है। प्रतिदिन तुलसी के नीचे घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।

4-कार्तिक माह में गंगा स्नान की विधि क्या है ?

कार्तिक मास में सूर्योदय से पहले गंगा स्नान करना शुभ माना जाता है। यदि गंगा जाना संभव न हो तो किसी नदी, तालाब या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।

5-कार्तिक मास के नियम क्या हैं ?

कार्तिक मास में तुलसी के नीचे दीपक जलाना, भगवान विष्णु की पूजा करना, दान देना और प्रतिदिन सूर्य को जल अर्पित करना शुभ और पुण्यदायक माना जाता है।

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Yashika Gupta

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