वरमहालक्ष्मी उत्सव कब है?
वर महालक्ष्मी उत्सव श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के अंतिम शुक्रवार को पड़ता है । यहां 28 अगस्त, 2026 के लिए वरलक्ष्मी व्रतम 2026 का समय दिया गया है।
- सिंह लग्न पूजा मुहूर्त: प्रातः 05:57 बजे से प्रातः 07:29 बजे तक (सुबह)
- वृश्चिक लग्न पूजा मुहूर्त: दोपहर 12:05 बजे से 02:23 बजे (दोपहर)
- वृषभ लग्न पूजा मुहूर्त: शाम 06:09 बजे से शाम 07:37 बजे तक (शाम)
वरलक्ष्मी व्रत का महत्व क्या है?
'वरदान देने वाला शुक्रवार' के रूप में जाना जाने वाला वर महालक्ष्मी पर्व मनोकामना पूर्ति के लिए मनाया जाता है। आइए वर महालक्ष्मी पर्व के महत्व को समझते हैं:
- शाब्दिक अर्थ: वर लक्ष्मी शब्द का अर्थ है 'इच्छाओं को पूरा करने वाली देवी'।
- उद्देश्य: यह व्रत मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा अपने घरों में धन, भोजन, आरोग्य, संतोष और समृद्धि लाने के लिए किया जाता है।
- दिव्य आशीर्वाद: ऐसा माना जाता है कि सच्ची भक्ति और निष्ठा के साथ वर लक्ष्मी की पूजा करना देवी लक्ष्मी के सभी आठ रूपों की पूजा करने के बराबर है।
- आठ रूपों की शक्ति: माँ लक्ष्मी के आठ रूप हैं धन (श्री), पृथ्वी (भू), विद्या (सरस्वती), प्रेम (प्रीति), यश (कीर्ति), शांति (शांति), आनंद (तुष्टि) और शक्ति (पुष्टि)।
- इतिहास: स्कंद पुराण में भी इस दिन के महत्व का उल्लेख है, जिसमें बताया गया है कि महिलाएं इस अवसर पर उपवास रखकर अपने परिवार में समृद्धि ला सकती हैं।
वरलक्ष्मी पूजा प्रक्रिया क्या है?
इसे वरलक्ष्मी नोम्बू विधि भी कहा जाता है, जिसमें समृद्धि और पारिवारिक कल्याण के लिए देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पूर्ण उपवास और पूजा अनुष्ठान किया जाता है।
- तैयारी (गुरुवार शाम): घर की सफाई करें, पूजा के बर्तन धोएं, नोम्बु सरदु/थोरम (9 गांठों वाला पीला धागा) और पोंगु नूल (एक पीला धागा) तैयार करें।
- सुबह की तैयारी: सुबह जल्दी स्नान करें, पीले रंग की रेशमी साड़ी पहनें , सोने के आभूषण धारण करें, रंगोली बनाएं और उपवास शुरू करें।
- कलश स्थापना: पानी, चावल, पान के पत्ते, सिक्के, आम के पत्ते और हल्दी लगे नारियल से सजा हुआ कलश स्थापित करें।
- पूजा करें: गणेश की पूजा करें, वरलक्ष्मी का आह्वान करें, फूल चढ़ाएं, मंत्रों का जाप करें और वरलक्ष्मी व्रत कथा का पाठ करें।
- नैवेद्यम एवं धागा बांधना: मीठा पोंगल और फल अर्पित करें, आरती करें, दाहिनी कलाई पर तोरम और गले में पोंगु नूल बांधें।
- सुमंगली पूजा: विवाहित महिलाओं को आमंत्रित करें, ताम्बुलम (पान के पत्ते, कुमकुम, ब्लाउज के टुकड़े) चढ़ाएं, प्रसाद वितरित करें।
- निष्कर्ष: 3 दिन बाद धागे हटा दें, पौधों में कलश का पानी डालें और चावल को घरेलू स्टॉक के साथ मिला दें।
वर लक्षमी व्रत के क्या लाभ हैं?
नीचे कई ऐसे लाभ दिए गए हैं जो देवी लक्ष्मी की पूजा करने या वर महालक्ष्मी उत्सव पर उपवास रखने से प्राप्त किए जा सकते हैं।
- धन, प्रसिद्धि और समृद्धि: हर साल इस दिन उपवास रखने का अर्थ है कि व्यक्ति को कभी भी अपने धन, प्रसिद्धि और समृद्धि के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं होगी।
- नकारात्मकता से सुरक्षा: इस दिन वरलक्ष्मी (मां लक्ष्मी) की प्रार्थना करने और उपवास रखने से बुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा मिलती है।
- अच्छा स्वास्थ्य: वर लक्ष्मि का व्रत रखने से व्यक्ति को अच्छे स्वास्थ्य, स्फूर्ति और शारीरिक शक्ति का आशीर्वाद मिलता है। वास्तव में, कई विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और संतान प्राप्ति के लिए भी यह व्रत रखती हैं।
- परिवार में शांति और सद्भाव: वर लक्ष्मी पूजा की उचित विधि का पालन करने से घर में शांतिपूर्ण, खुशहाल और सकारात्मक वातावरण बनता है।
- इच्छाओं की पूर्ति: चूंकि यह वरदान देने वाला दिन है, इसलिए वर लक्ष्मी व्रत पूजा से व्यक्ति आसानी से अपनी भौतिक इच्छाओं को पूरा कर सकता है और अपने भाग्य को बढ़ा सकता है।
वरलक्ष्मी व्रत कथा क्या है?
इस कथा को वर लक्ष्मी व्रत कथा के रूप में देखा जाता है, और इसका पाठ करना वर महालक्ष्मी उत्सव का एक हिस्सा है।
विदर्भ साम्राज्य के कुंडिनग्राम की एक समर्पित महिला चारुमथी के सपने में देवी लक्ष्मी प्रकट हुईं और उन्हें श्रावण महीने में शुक्रवार को वरलक्ष्मी व्रत करने का निर्देश दिया।
अगली सुबह, चारुमति ने अपने पति को उस दिव्य सपने के बारे में बताया, और यह खबर पड़ोसियों में तेज़ी से फैल गई। तयशुदा शुक्रवार को, वह जल्दी उठी, अपना घर साफ किया और एक सजा हुआ कलश स्थापित किया।
इसके बाद, उन्होंने अन्य महिलाओं के साथ वरलक्ष्मी व्रत पूजा की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवी लक्ष्मी ने उन्हें सोना, धन और समृद्धि का आशीर्वाद दिया। तब से, यह व्रत दक्षिण भारत में श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है।
वरलक्ष्मी पूजा के दौरान क्या करें और क्या न करें?
वर लक्ष्मी व्रत के दौरान व्रत रखने वाले भक्तों को कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। वर लक्ष्मी व्रत के दिन पालन किए जाने वाले आवश्यक नियम निम्नलिखित हैं:
- भोजन करना: इस दिन व्रत रखने वाले भक्तों को तामसिक भोजन या खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए। इस दिन उन्हें शराब का सेवन करने और धूम्रपान करने की भी मनाही है।
- स्वच्छता बनाए रखना: देवी लक्ष्मी को पवित्रता और स्वच्छता की देवी माना जाता है। इस दिन घर की अच्छी तरह सफाई करें और फालतू सामान हटा दें।
- गपशप या क्रोध से बचें: वर लक्ष्मी व्रत पूजा और व्रत के दिन गपशप करने और मन में बुरे विचार लाने से बचना चाहिए। दूसरों के प्रति क्रोध या अनादर दिखाना धन की देवी लक्ष्मी को क्रोधित करता है।
- नाखून या बाल काटना मना है: वर लक्ष्मि व्रत के दिन बाल कटवाना या नाखून काटना कतई मना है। भाग्य कभी भी इन गतिविधियों को करने वालों का साथ नहीं देता।
- वरलक्ष्मी नोम्बु विधि का पालन करें: इस दिन, सौभाग्य प्राप्त करने के लिए वरलक्ष्मी पूजा की विधि का चरणबद्ध तरीके से पालन करें। मूर्ति को केवल लाल गुलाब और कमल के फूल ही अर्पित करें। सफेद फूलों से बचें।
वरलक्ष्मी व्रतम उपाय क्या हैं?
देवी लक्ष्मी हमेशा वहीं निवास करती हैं जहाँ स्वच्छता, सत्य, करुणा और बुराई का अभाव होता है। देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए नीचे दिए गए शक्तिशाली वर लक्ष्मी उपायों का पालन करें।
- धन और करियर के लिए वरलक्ष्मी व्रतम् उपाय
पांच, सात या ग्यारह लौंग लें, उन्हें लाल कपड़े में लपेटें और अपने पर्स, तिजोरी या पैसे रखने वाली जगह पर रखें। वर महालक्ष्मी उत्सव के दौरान इस सरल लेकिन कारगर अनुष्ठान को करने वालों को कभी भी आर्थिक तंगी नहीं होगी।
- मनोकामना पूर्ति के लिए वरलक्ष्मी व्रतम् उपाय
शाम को वर लक्ष्मी व्रत पूजा करने के बाद कन्या भोज का आयोजन करें। घर की छोटी बच्चियों को भोजन कराएं और मां लक्ष्मी से अपनी सभी मनोकामनाएं पूरी करने की प्रार्थना करें। उन्हें रसगुल्ला जरूर खिलाएं, जो मां लक्ष्मी की प्रिय मिठाई है।
- वैवाहिक सुख के लिए वरलक्ष्मी व्रतम् उपाय
वर लक्ष्मी व्रत के दिन देवी लक्ष्मी को सिंदूर अर्पित करें। ऐसा माना जाता है कि इससे विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और दंपत्तियों को सुख और शाश्वत प्रेम का आशीर्वाद मिलता है। अविवाहित भक्त भी शीघ्र विवाह के लिए यह उपाय कर सकते हैं।
सारांश
वर लक्ष्मी व्रतम पूजा श्रावण महीने के अंतिम शुक्रवार को मनाई जाती है, जिसमें देवी लक्ष्मी से धन, समृद्धि और पारिवारिक सुख की प्रार्थना की जाती है। भक्त अपने घरों की सफाई करते हैं, सजाए गए कलश स्थापित करते हैं, अनुष्ठान करते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं, नैवेद्य चढ़ाते हैं, पवित्र धागे बांधते हैं और दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए प्रसाद वितरित करते हैं।
अन्य महत्वपूर्ण त्योहारों के बारे में पढ़ें