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बाथरूम और शौचालय ऐसे स्थान होते हैं जहाँ हम अपने शरीर की गंदगी और नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकालते हैं। अगर इन जगहों के लिए वास्तु के नियमों का सही तरह से पालन न किया जाए तो यह नकारात्मक ऊर्जा वहां जमा हो सकती है और घर के माहौल को प्रभावित कर सकती है।
क्या आप जानते हैं बाथरूम की सही दिशा (Bathroom ki sahi disha) कौन सी है? आइए वास्तु के अनुसार बाथरूम की दिशा के बारे में सही जानकारी हासिल करते हैं ।
क्या आप सोच रहे हैं कि वास्तु के अनुसार शौचालय का स्थान किस दिशा में होना चाहिए? आइए वास्तु के सिद्धांतों के अनुसार हिंदी में बाथरूम वास्तु (Bathroom vastu in hindi) पर नज़र डालें।
यहां तक कि नल, शॉवर और फर्श की स्थिति भी वास्तु शास्त्र में महत्वपूर्ण है। तो आइए बाथरूम की सही दिशा (Bathroom ki sahi disha), जरूरी सामान और तत्वों पर नज़र डालें और देखें कि कहीं आप वास्तु से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को भूल तो नहीं रहे हैं।
क्या आप भी सरल हिन्दी में बाथरूम वास्तु (Bathroom vastu in hindi) टिप्स जानना चाहते हैं तो आइए उन रंगों और फर्श सामग्री पर नज़र डालें जो आपके बाथरूम को 'वास्तुपूर्ण' बनाने के लिए चुनना चाहिए।
अगर आप अपने बाथरूम में कुछ सामान्य गलतियाँ करते हैं तो स्वास्थ्य समस्याएं, वित्तीय नुकसान और मानसिक शांति की कमी आपके घर का हिस्सा बन जाती है। आइए सबसे पहले घर में बाथरूम की दिशा के लिए वास्तु से जुड़ी इन गलतियों को पहचानें और उनका समाधान खोजें।
वास्तु दोष: उत्तर पूर्व दिशा भगवान ईशान (भगवान शिव का दूसरा रूप) द्वारा शासित है और इसे प्रार्थना और ध्यान के लिए एक स्थान माना जाता है। यहां शौचालय या बाथरूम होने से परिवार में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और रिश्तों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
उपाय: इस वास्तु दोष को कम करने के लिए आप बाथरूम में सुगंधित मोमबत्तियाँ या कपूर रख सकते हैं। इससे अच्छी खुशबू फैलेगी और अरोमाथेरेपी जैसा असर मिलेगा आप नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए पौधे (मनी प्लांट या स्पाइडर प्लांट) भी लगा सकते हैं।
वास्तु दोष: वास्तु के अनुसार शौचालय की दिशा होने से संतान प्राप्ति में समस्या हो सकती है और विवाह प्रस्ताव अस्वीकार हो सकते हैं। क्योंकि दक्षिण-पूर्व (अग्नि तत्व) दिशा बाथरूम (जल तत्व) से टकराती है और ऊर्जा असंतुलन पैदा करती है।
समाधान: यदि आपके घर में बाथरूम की दिशा दक्षिण-पूर्व में है तो आप पूर्व की दीवार पर तांबे का वास्तु हेलिक्स या हिमालयन नमक से भरा कटोरा रख सकते हैं और इसे सप्ताह में एक बार बदल सकते हैं।
वास्तु दोष: शौचालय या स्नानघर का दरवाजा घर के मुख्य क्षेत्रों जैसे कि रसोई घर, मुख्य प्रवेश द्वार या पूजा कक्ष की ओर होना एक प्रमुख वास्तु दोष है।
उपाय: इस वास्तु दोष को ठीक करने का एकमात्र उपाय यह है कि अपने बाथरूम के दरवाज़े बंद रखें या आप पर्दे लटका सकते हैं।
वास्तु दोष: ब्रह्म स्थान (घर के मध्य भाग) में शौचालय होने से ऊर्जा में व्यवधान और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। यह वह स्थान है जहाँ वास्तु पुरुष (वास्तु के देवता) की नाभि स्थित है और यह पूरे घर के लिए सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत है।
उपाय: इस वास्तु दोष को रोकने के लिए अपने शौचालय को किसी दूसरी दिशा में बनाने का प्रयास करें। आप शौचालय की बाहरी दीवार पर पिरामिड शिफ्ट एरो लगा सकते हैं।
वास्तु दोष: पूजा कक्ष को सबसे पवित्र क्षेत्र माना जाता है क्योंकि यह वह जगह है जहाँ आप प्रार्थना और ध्यान करते हैं। इसी तरह आपकी रसोई आपके परिवार के स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार है। इनमें से किसी भी क्षेत्र के ऊपर बाथरूम बनाने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और मानसिक शांति की कमी हो सकती है।
उपाय: इस वास्तु दोष को ठीक करने के लिए अपने रसोईघर में पीले रंग का प्रयोग करें और वास्तु क्रिस्टल रखें। हालांकि वास्तु विशेषज्ञ स्थायी समाधान के लिए अपने बाथरूम को बदलने का सुझाव देते हैं।
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